जिओ कैप्शूल: 5 मिनट में पढ़ें 12 जनवरी की सभी बड़ी खबरें

पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बोले SC जज, सब कुछ ठीक नहीं


आजाद भारत के इतिहास में शुक्रवार को पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिससे खलबली मच गई। सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया से मुखातिब होकर प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता के लिहाज से मुख्य न्यायाधीश के ठीक बाद इन चार जजों का नंबर आता है। सुप्रीम कोर्ट में नंबर दो के जज माने जाने वाले जस्टिस चेलामेश्वर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'करीब दो महीने पहले हम 4 जजों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा और मुलाकात की। हमने उनसे बताया कि जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है। प्रशासन ठीक से नहीं चल रहा है। यह मामला एक केस के असाइनमेंट को लेकर था।' उन्होंने कहा कि हालांकि हम चीफ जस्टिस को अपनी बात समझाने में असफल रहे। इसलिए हमने राष्ट्र के समक्ष पूरी बात रखने का फैसला किया। यह घटना ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर जज मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं और सार्वजनिक तौर पर न्यायपालिका का पक्ष चीफ जस्टिस ही रखते रहे हैं।
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चारों जज 'ईमानदार', पीएम दखल दें: सुब्रमण्यम स्वामी


सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि वह मीडिया से रू-ब-रू होने वाले सुप्रीम कोर्ट के चारों जजों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि वह उनका दुःख समझ सकते हैं। स्वामी ने कहा कि जजों का दर्द साधारण नहीं रहा होगा तभी उन्होंने प्रेस के सामने आकर अपनी बात रखने का रास्ता चुना। मेरी राय इन चारों जजों के लिए उच्चकोटि की है, ये सभी बेहतरीन जज हैं। स्वामी ने कहा कि अब प्रधानमंत्री को इस मामले में दखल देकर इसका समाधान निकालना चाहिए। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि ये पहली बार हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया के सामने अपनी बात रखी हो। सुप्रीम कोर्ट का जो ये मामला सामने आया है, उसे गंभीरता से देखने की जरूरत है। ऐसा होना लोकतंत्र के लिए खतरा है। जजों का आरोप बेहद अहम है, उनके सवालों का निपटारा होना चाहिए।
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बिल न चुका पाने वाले मरीजों को रोककर रखना गैरकानूनी: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि बिलों का भुगतान नहीं होने पर किसी मरीज को अस्पताल में रोककर रखना गैरकानूनी है और सभी को इस बात की जानकारी होनी चाहिए। न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति भारती डोगरा की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग को रोगियों के कानूनी अधिकारों और दोषी अस्पतालों के खिलाफ लागू होने वाले दंडनीय प्रावधानों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, 'कोई अस्पताल किसी व्यक्ति को केवल इस आधार पर कैसे रोककर रख सकता है कि शुल्क का भुगतान नहीं हुआ, जबकि उसे सेहतमंद घोषित किया गया है। इस तरह का अस्पताल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आजादी का हरण कर रहा है।' पीठ ने कहा, 'जनता के प्रत्येक सदस्य को पता होना चाहिए कि अस्पताल की ओर से इस तरह की कार्रवाई गैरकानूनी है।'
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सीएम योगी की तारीफ में बोले पीएम मोदी, ट्विटर पर बखूबी खेल रहे


पिछले दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच ट्विटर वॉर हुआ था। कर्नाटक दौरे पर पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक सरकार पर जमकर हमला भी बोला था। उन्होंने कहा था कि हिंदुत्व की ताकत देखकर सिद्धारमैया को हिंदू याद आ गए हैं। अब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री के बीच हुए ट्वीट वॉर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया भी आ गई है। इस पर अपने पुराने अंदाज में पीएम ने कहा 'योगी जी भी कम खिलाड़ी नहीं हैं। कई राज्यों में बहुत लोगों के साथ हमारे योगी जी ट्विटर-ट्विटर का खेल खेल रहे हैं और ट्विटर के खेल में भी उन्होंने अच्छे-अच्छे खिलाड़ियों को हरा दिया।'
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बक्सर में सीएम नीतीश के काफिले पर पत्थरबाजी, कई घायल


बिहार के बक्सर में सीएम नीतीश कुमार के काफिले पर हमले की खबर है। यहां के नंदर गांव से सीएम का काफिला जैसे गुजरा, उस पर पत्थरबाजी हो गई। न्यूज 18 हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश कुमार को वहां से सुरक्षित निकाल लिया गया। बताया जा रहा है कि कुछ लोग सीएम के नंदर गांव की दलित बस्ती को आने की मांग कर रहे थे। इसी को लेकर विवाद हो गया जिस पर स्थानीय लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थरबाजी में कई लोगों के घायल होने की खबर है। नंदर गांव के लोगों का आरोप है कि 'सात निश्चय कार्यक्रम' में कोई काम नहीं हुआ है। इसी को लेकर लोगों का विरोध था।
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